Monday, 28 October 2013

मोदिनामा

मैं मोदी -भक्त नहीं हूँ ! मोदी की उपयुक्त आलोचना मैं करते रहा हूँ ! वो सर्व गुण संपन्न नहीं हैं ! लेकिन ,आज के राजनीतिक परिदृश्य में कोई मोदी के जैसा निर्भीक व निर्णायक छवि वाला भी नहीं ! 

मोदी लल्लो -चप्पो वाली राजनीति से दूर हैं ! और ,यही उन्हें ख़ास बनाती है ! अगर मोदी नहीं तो किसको सपोर्ट करूँ - राहुल गाँधी को ,मुलायम सिंह को ,ममता बनर्जी को ,नीतीश को,रॉबर्ट वाड्रा को या फिर मनमोहन को ??

भाजपा में आडवाणी 8 6 के हो चले ,सुषमा में वाक्पटुता है पर परिणाम केन्द्रित कार्यकुशलता नहीं , अरुण जेटली बातों के धनी है पर जनाधार नहीं ,शिवराज सिंह/रमण सिंह राहुल द्रविड़ सरीखा समर्पित व अच्छे खिलाड़ी हैं पर कप्तानी में पिछड़ जाते हैं !! 

बोलिए किसको सपोर्ट करें ? एक ही विकल्प बचता है - नरेन्द्र मोदी !

पूरा भारतीय सरकारी तन्त्र और दुनिया पिछले 1 1 वर्षों से एक शख्स के पीछे पड़ी है ! अब तक किसी को कुछ नहीं मिला ! क्या मोदी जादूगर है या भगवान जो इतने सब के बावजूद सब कुछ/सब सबूत गायब कर दिया ? या ,फिर मोदी ही एक बलवान है और सब के सब कामचोर व कमजोर ? रह रह के सिवाय परिवर्तनीय गवाही के अलावा कुछ नहीं मिलता भारत सरकार के तन्त्र को ! ये गवाह भी बाद में पेड व झूठे साबित होते हैं! तीस्ता सीतलवाड़ ,संजीव भट्ट ,बंजारा आदि सब के हकीकत सामने हैं ! 

यह शख्स खुद कह रहा है ललकार कर - "अगर मैं दोषी हूँ तो मुझे फांसी पर लटका दो "! क्या सोनिया गाँधी /मनमोहन सिंह यह गर्जना कर सकते हैं ?

आज के किस राजनेता में यह दम है कि तमाम झंझावतों के बीच वह आगे बढ़कर न केवल ललकारे व नेतृत्व करे ,अपितु ,विकास का विजन भी दे स्टेप बाय स्टेप ! 

अतएव ,बंधुवर हठ धर्मिता त्याग विवेक का प्रयोग कीजिये और राष्ट्र निर्माण में मोदी के माध्यम से योगदान कीजिये !

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