हवा का रुख !
लोग बड़ा परेशान हैं 12 साल बाद पासवान राजग में आ गए हैं। इसको किस नजर से देखे ? नीतिश या लालू के नजर से देखे ?नीतिश के नजर से देखने वालो को लग रहा है कि कुछ मिलते -मिलते रह गया। बहुत आशा थी पासवान से पर कुछ मिला नहीं। चार महीने कि कोशिश बीजेपी मार ले गया। लालू जी के नजर से देखने वालो को समझ नहीं आ रहा है कि हमें फायदे है या नुक़सान ? पर जो पासवान पिछले चुनाव में 5 से 6 % वोट ला ये थे उसका क्या ?जाहिर है पासवान जी का बिहार के जातिगत राजनीति कुछ तो प्रभाव है। अब तो पता नहीं कांग्रेस को क्या लग रहा है कि मेरे सहारे लालू जी हैं या मैं लालू जी के सहारे बिहार कि राजनीति में। खुश कौन है ? बड़े पासवान , छोटे पासवान या दोनों ? बड़े वाले तो होंगें कि जो भी सीट हमने माँग कि वो तो मिल गया नहीं तो लालू जी 2 से ज्यादा तो देते नहीं। जहाँ तक बेटे कि बात है वो भी सक्रिय राजनीति में हवा के साथ जीत जाएगा। सब मिला कर पासवान को तो लाभ ही लाभ है। उसके बदले में नरेंद्र मोदी को क्लीन चीट दे दिया। उसी मोदी को लेकर 12 साल पहले छोड़ कर चले गये थे। क्यों नहीं देते क्लीन चीट जहाँ बेटा और पार्टी दोनों दाऊ पर लगा हुआ था। इन सरे चीजों में सब से ज्यादा लाभ बीजेपी को हुआ है। जहाँ 13% दलित है उस से उम्मीद को कुछ कि ही जा सकती है।
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